द्वितीय विश्व युद्ध क्यों हुआ इसके कारण और परिणाम..

द्वितीय विश्व युद्ध – (Second world war) को वैश्विक युद्ध या कुल युद्ध कहा जाता है। कुल युद्ध इसलिए क्योंकि आज से पहले के सभी युद्धों में विरोधी देशों की सेना आपस में लड़ती थी। यह लड़ाई विश्व युद्ध 2 में विरोधियों तक सीमित नहीं थी। इसमें आम लोगों को निशाना बनाया जा रहा था, जहाजों की मदद से आम लोगों के घरों पर बम गिराए जा रहे थे। वित्तीय दुनिया तबाह हो गई थी। द्वितीय विश्व युद्ध 1 सितंबर 1940 से 2 सितंबर 1945 तक चला।
लेकिन कुछ लोग 1937 के चीन-जापान युद्ध को युद्ध की शुरुआत मानते हैं, बाद में यह द्वितीय विश्व युद्ध का हिस्सा बन गया।
द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल देश – countries involved in second world war
मित्र देश – (अलाइड पावर )
इसमे इंग्लैंड, फ्रांस, अमेरिका, रूस (ussr) और चीन जैसे देश इसमें शामिल थे।
केंद्रीय शक्ति – (सेंट्ल पावर )
इसमें नाजी जर्मनी, इटली और जापान जैसे देश शामिल थे।
उस समय भारत एक ब्रिटिश उपनिवेश था, इसलिए भारत को न चाहते हुए भी इस विश्व युद्ध में शामिल होना पड़ा।
द्वितीय विश्व युद्ध के कारण – causes of second world war 
1) सैन्यवाद का उदय
जापान में सैन्यवाद पूरे ज़ोर पर था और जापान अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा था और आसपास के देशों पर हमला कर रहा था।
२) वर्साय की संधि
इन देशों के बीच प्रथम विश्व युद्ध के बाद, जर्मनी को इस संधि द्वारा विश्व युद्ध 1 के लिए जिम्मेदार घोषित किया गया। और जर्मनी पर कई जुर्माने लगाये गये थे। जर्मनी को सेना रखने पर भी रोक थी। इस बात से वहां के लोग बहुत नाराज थे।
३) साम्राज्यवाद
उस समय सबसे शक्तिशाली ताकतें ब्रिटेन और फ्रांस थीं, लेकिन जापान और जर्मनी उनसे मुकाबला करने के लिए उभर रहे थे। वे सभी इस बात की होड़ में थे कि कौन अपने बीच अधिक संसाधन और क्षेत्र बना सकता है। यही कारण है कि बाद में द्वितीय विश्व युद्ध हुआ।
4) राष्ट्रवाद और तानाशाही का उदय
जर्मनी में हिटलर और इटली में मुसोलिनी जैसे तानाशाह विश्व युद्ध के लिए जिम्मेदार बन गये। उसी समय, जापान पर राजा का शासन था, लेकिन सेना का प्रभुत्व भी था, जिसमें सेना के अधिकारी तानाशाही के रूप में कार्य करते थे।
5) संयुक्त राष्ट्र की विफलता
प्रथम विश्व युद्ध के बाद, प्रथम विश्व युद्ध जैसे युद्ध को रोकने के लिए राष्ट्र संघ की स्थापना की गई थी, लेकिन यह संगठन अपना काम करने में असमर्थ रहा। 1931 में जापान ने चीन के मंचूरियन पर कब्जे के बाद भी संगठन असफल रहा।
6) अपरिमेय सीमाएँ
प्रथम विश्व युद्ध के बाद, यूरोप में कई देशों का गठन किया गया था, लेकिन इन देशों ने इस बात का ध्यान नहीं रखा कि एक ही भाषा बोलने वाले लोग, एक ही संप्रदाय के लोग एक साथ आऐ। कई जर्मन लोग पोलंड ओर चेकोस्लाविया के क्षेत्र में चले गए, लेकिन इन लोगों ने अभी भी खुद को जर्मन माना था।
7) हिटलर और नाजी पार्टी का उदय-
हिटलर से उम्मीद की एक किरण थी, क्योंकि जो लोग वर्साय की संधि से परेशान थे, वे जर्मनी में हिटलर के अधिकार के तहत आए थे। उन्होंने महसूस किया कि वर्साय द्वारा जर्मनी के साथ अन्याय किया गया था। उन्हें हिटलर से न्याय जरूर मिलेगा।
8) जर्मनी में 1933 में हिटलर और नाजी पार्टी सत्ता में आना –
नाजी पार्टी को नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी कहा जाता था। इस पार्टी की विचारधारा यहूदी विरोधी थी। वे मानते थे कि आर्य जाति दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है। इसके अलावा, जो लोग जर्मनी में रहते हैं उन्हें हटाया जाना चाहिए या उन्हें मार दिया जाना चाहिए। उसी कट्टरपंथी विचारधारा के कारण, हिटलर तानाशाह बन गया, वर्साय संधि को तोड़ दिया और सेना का गठन शुरू किया।, जो वर्साय संधि के खिलाफ थी।
द्वितीय विश्व युद्ध के कुछ अंन्य कारण – Other causes of second world war 
1) दूसरा चीन – जापान युद्ध एशिया में हुआ, जिसे जापान ने चीन के मंचूरियन पर कब्जा कर लिया।
2) 1936 में, वर्साय की संधि के तहत जर्मनी को सेना रखने के लिए मना किया गया था। लेकिन राईनलैंड नामक क्षेत्र पर जो बेल्जियम और जर्मनी के बीच पड़ता है, वहां सेना भेजकर जर्मनी ने उस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया।
3) 1938 में, जर्मनी ने ऑस्ट्रिया और चेकोस्लाविया को जर्मनी में शामिल कर लिया। लेकिन मित्र देशों की सेना ने अभी तक हिटलर के खिलाफ कुछ नहीं किया था। क्योंकि फ्रांस और ब्रिटेन नहीं चाहते थे कि छोटे देशो के कारण युद्ध की आग पूरी दुनिया में फैलें। चेकोस्लोवाकिया और ऑस्ट्रिया जैसे देशों पर कब्जा करके भी हिटलर की भूख नहीं मिटी थी। अब उसका अगला लक्ष्य पोलैंड था, लेकिन पोलैंड को हराना इतना आसान नहीं था क्योंकि फ्रांस और इंग्लैंड ने पोलैंड की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली थी।
4) हिटलर ने अब रूस के साथ एक नई संधि की और रूस के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसे माल्टोव रिबेंट्रैप संधि कहा जाता है। इस समझौते ने जर्मनी और रूस को एक दूसरे पर हमला नहीं करने के लिए मजबूर किया और दोनों ने एक साथ मिलकर किसी भी विरोधी देश पर हमला करने की योजना बनाई। और पोलैंड को आधे में विभाजित करने का फैसला किया।
द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत – Beginning of second world war
1 सितंबर 1938 को जर्मनी ने पोलैंड पर हमला किया और विश्व युद्ध शुरू हो गया। बदले में, फ्रांस और ब्रिटेन ने जर्मनी पर हमले की घोषणा की। दूसरी ओर, रूस ने जर्मनी का समर्थन किया और पोलैंड पर आक्रमण किया और कुछ ही दिनों में पोलैंड पर जीत हासिल की और एक-दूसरे ने आधे आधे बाट लिया। अब रूस ने एस्टोनिया, लातविया और लिथोनिया में अपनी सेनाएँ भेजीं और कब्जा कर लिया।
नई रणनीति का उपयोग 
वर्ष 1940 में जर्मनी अपने पूर्ण फाॅर्म में था। वह युद्ध के लिए नई रणनीतियों को लागू करता था। इस तकनीक के साथ, सेना एक दिन में 100 से 150 किमी आगे बढ़ जाती थी। इसके लिए सेना ने टैंक और ट्रकों का इस्तेमाल किया। इस तकनीक द्वारा, जर्मनी ने 1940 में 4 महीने के भीतर नॉर्वे, डेनमार्क, बेल्जियम और नीदरलैंड को जीत लिया और यूरोप के बहुत बड़े क्षेत्र पर कब्जा कर लिया।
फांस पर हमला 
 
उनका अगला निशाना फ्रांस था। 10 जून 1940 को, जर्मनी ने फ्रांस पर आक्रमण किया और उसे चार दिनों के भीतर हरा दिया। उन्होंने 14 जून को पॅरिस पर विजय प्राप्त की। इसी समय पूरी दुनिया हिटलर के खौफ मे थी।
बिटेन पर हमला 
 
अब जर्मनी का अगला निशाना ब्रिटेन था। जर्मनी और ब्रिटेन की इस लड़ाई को ग्रेट वाॅर ऑफ ब्रिटेन के नाम से जाना जाता है। इस लड़ाई की खास बात यह थी कि दोनों देशों की सेनाएं आसमान में लड़ रही थीं। जर्मनी चाहता था कि ब्रिटेन आत्मसमर्पण करे, या समझौता करे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि ब्रिटेन की वायु सेना जर्मन वायु सेना को पीछे धकेलने के लिए बहुत शक्तिशाली थी। इसके साथ ही हिटलर ने बिना किसी समझौते के इस युद्ध को रोक दिया।
1940 में एक और समझौता हुआ। उसका नाम त्रिप्रैती पॅक था। यह जापान, जर्मनी और इटली में हुआ। इसके साथ ही एक्सिस पावर का जन्म हुआ। बाद में, हंगरी बुल्गारिया और रुमानिया में शामिल हो गए। 1940 के अंत तक, जर्मनी ने ग्रीस और यूगोस्लाविया को जीत लिया था और इसी के साथ पूरे यूरोप को जीत लिया था। इसके बाद हिटलर चुप नहीं रहा। नाजी पार्टी का मानना ​​था कि उन्हें रहने के लिए अधिक स्थान की आवश्यकता है। जबकि जर्मन सीमा काफी सीमित थी। ऊनका मानना था कि ऐसा लिविंगस्पेस कहां पा सकते हैं?
रशिया पर हमला 
हिटलर ने तब रूस पर हमला करने की योजना बनाई। उसने 1941 में रूस पर हमला किया लेकिन अन्य देशों की तरह रूस को नहीं हरा सका। इसके पीछे कारण था मौसम और बर्फबारी जर्मन सैनिक इसमें खड़े नहीं हो सके।
अब बात करते हैं एशिया की –
एशिया महाद्वीप के 1940 के दशक तक, जापान ने चीन के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। अब जापान भी एक्सिस पावर का हिस्सा बन गया था। जापान के पास एक बहाना था कि वह एशिया में इंग्लैंड के उपनिवेशों पर हमला कर सकता था। उन्होंने इंडो-चायना वियतनाम, बर्मा, हांगकांग, गुआम, इंडोनेशिया, सिंगापुर और फिलीपींस पर कब्जा कर लिया। उस समय यह अमेरिका के उपनिवेश थे। अब यह उपनिवेश जापान ने ले लिए थे। इसलिए अमेरिका ने सभी तेल कंपनियों को जापान को तेल बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया।
पर्ल हार्बर पर हमला-
यही कारण है कि जापान ने दिसंबर 1941 में अमेरिका में पर्ल हार्बर पर हमला किया था। इस हमले में 2500 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे और कुछ जहाज भी क्षतिग्रस्त हो गए थे। यही कारण है कि अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध में प्रवेश करने की घोषणा की। उसने 2 साल तक जापान के साथ लड़ाई लड़ी और जापान से सभी कब्जे वाले देशों को वापस ले लिया।
1942 तक, एक्सिस पावर की जीतने वाली लकीर थम गई थी और एलाइड पॉवर ने जर्मनी और इटली को मोरक्को और ट्यूनीशिया से बाहर निकाल दिया, इटली पर आक्रमण किया और इटली का आधा हिस्सा जीत लिया।
दूसरी ओर, 1944 में, सोवियत सेना (ussr) यूरोप के पूर्व से जर्मनी से बर्लिन की ओर चली गई।
उसी समय, विश्व युद्ध का प्रभाव भारत पर देखा गया था। जापान ने असम पर आक्रमण किया और इसे इम्फाल की लड़ाई के रूप में भी जाना जाता है। लेकिन ब्रिटिश सेना ने जापानी सेना को पीछे की ओर धकेल दिया।
फांस को जर्मनी से आजादी-
 
अब एलाइड पॉवर ने फ्रांस को जर्मनी से मुक्त कर दिया और 6 जून 1944 को उत्तर-पूर्व फ्रांस में अपनी सेना शुरू की और फ्रांस को जर्मनी से आजादी दिलाई। 1945 तक, जर्मन सेना पूरी तरह से हार गई थी। और मित्र देशों की सेना नीदरलैंड और बेल्जियम के रास्ते से बर्लिन तक पहुंची और जर्मन सेना ने 29 अप्रैल 1945 को हार मान ली। 30 अप्रैल 1945 को हिटलर ने आत्महत्या कर ली और जर्मनी विश्व युद्ध हार गया।
Second world war  
लेकिन जापान अभी भी सक्रिय था। इसे रोकने के लिए, अमेरिका ने 6 अगस्त और 9 अगस्त को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए और 15 अगस्त को जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया।
मित्र देशों के जित से बिटेन ने भारत को 15 अगस्त को स्वतंत्रता देने की घोषणा कर दी।
विश्व युद्ध के परिणाम – second World War results
अमेरिका और रूस में शीत युद्ध शुरू हो गया। यह युद्ध 1947 से 1991 तक चला था। इस शीत युद्ध के साथ, दुनिया दो भागों में विभाजित हो गई थी।
1) नाटो – उत्तर अटलांटिक संधि संगठन।
2) वर्सो पैक – जो रूस द्वारा बनाया गया था। रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका ने जर्मनी को दो भागों में विभाजित किया। बाकी लोगों को जर्मनी भेज दिया गया, ताकि वे यह कहकर विश्व युद्ध 3 शुरू न करें कि उनके लोग वहां थे और वे वहां कब्जा करना चाहते हैं ।
second world war – द्वितीय विश्व युद्ध मे  70 से 80 मिलियन लोगों को जान गई , यह उस समय के दुनिया की 3% आबादी के लिए बराबर थी। उसके बाद, फ्रांस और इंग्लैंड के उपनिवेश मुक्त हुए। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की गई ताकि विश्व युद्ध 3 न हो सके। यह बहुत सफल रहा।
इजरायल का गठन 
तब इजरायल का गठन किया गया था, और जापान के कई द्वीपों पर रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका का कब्जा था। कई जगहों पर अमेरिकी सेना के ठिकाने थे, जिन्हें कुछ दिनों बाद खाली कर दिया गया था।
चीन मे राष्ट्रवादी और साम्यवादी संघर्ष –
उसी समय, चीन में राष्ट्रवादी और साम्यवादी संघर्ष चल रहे थे। कम्युनिस्टों की जीत हुई और यह संघर्ष 1949 में समाप्त हो गया। राष्ट्रवादी तब ताइवान चले गए और वे अब भी वहां शासन करते हैं।
भारत पर असर 
भारत की बात करें तो भारत ने भी युद्ध में भाग लेने से इनकार कर दिया। लेकिन कई राजाओं ने अपनी रियासत की सेना कई जगहों पर भेजी। जिन्होंने ब्रिटिश सेना के साथ युद्ध मे भाग लिया। 25 लाख सैनिक यहां से गए, उनमें से 78 हजार सैनिक शहीद हो गए। उस समय यह भारत के बंगाल में, जिसमें आज पश्चिम बंगाल, असम और वर्तमान बांग्लादेश में भुखमरी के कारण 3 से 4 मिलियन लोग मारे गए। क्योंकि उस क्षेत्र में खेती मुख्य रूप से चावल की थी, जिसे ब्रिटिश सरकार ने उनकी सेना को भेजा था। लेकिन इसके कारण लोगों में चावल की कमी हो गई और कई लोग भुखमरी के कारण मर गए।
संक्षिप्त करें-
Second world war – इस युद्ध में जो भी जीता हो, लेकिन दोनों तरफ के  लोग मारे गए थे और उस समय प्रगति की जा रही थी। उस समय से सभी देश 30 से 40 साल तक पिछड़ गए। और उन्हें कवर करने में अगले 15 से 20 साल लग गए। भगवान न करे कि अगला तीसरा विश्व युद्ध हो! लेकिन अगर होता है तो इसमें परमाणु हथियारोका उपयोग होगा। जो लोग पहले और दूसरे विश्व युद्ध में मर चुके थे उनके शव देख सकते थे। लेकिन तीसरे विश्व युद्ध मे उन्हें नहीं देखा जाएगा। क्योंकि यह ग्रह खुद हीं नही बचेगा ..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *